भारतवर्ष में सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए सबसे पवित्र और भावनात्मक पर्वों में से एक है — करवा चौथ।
यह व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है।
स्त्रियाँ दिनभर निर्जला रहकर शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही जल ग्रहण करती हैं।
यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समर्पण, प्रेम और आस्था का प्रतीक है।
🗓️ करवा चौथ 2025 की तिथि और मुहूर्त
- तिथि: शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 10 अक्टूबर, प्रातः 6:15 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर, प्रातः 4:05 बजे
- चंद्रोदय का समय: रात्रि लगभग 8:10 बजे (शहर अनुसार भिन्न हो सकता है)
- व्रत पारण: चंद्रदर्शन के पश्चात
🌸 करवा चौथ व्रत का महत्व
करवा चौथ का व्रत सौभाग्य, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
स्त्रियाँ इस दिन पूरे दिन बिना जल के उपवास रखती हैं, ताकि उनके पति की आयु लंबी और जीवन सुखी हो।
यह व्रत केवल शारीरिक तप नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति और प्रेम की परीक्षा भी है।
शास्त्रों में कहा गया है —
“पतिव्रता नार्यः पतिव्रतानां बलं महत्।”
अर्थात — पतिव्रता स्त्री की तपस्या से ही उसके पति का जीवन दीर्घ और उज्जवल होता है।
🔱 करवा चौथ का धार्मिक आधार
करवा चौथ का उल्लेख कई पुराणों और व्रत ग्रंथों में मिलता है, जैसे —
- स्कंद पुराण (व्रत खंड)
- भविष्य पुराण (व्रत पर्व)
- पद्म पुराण (उत्तर खंड)
इन ग्रंथों में इसे “करक चौथ” कहा गया है।
व्रत का विधान है कि स्त्रियाँ स्नान कर, नए वस्त्र धारण कर, मां गौरी और चंद्रदेव की पूजा करें, फिर रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करें।
🪔 करवा चौथ पूजा विधि (Puja Vidhi)
- प्रातःकाल स्नान व संकल्प
सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें —
“मम सुखसौभाग्यसिद्ध्यर्थं करकचतुर्थीव्रतं करिष्ये।”
अर्थात — “मेरे पति के दीर्घ जीवन और सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हूँ।” - करवा स्थापन
एक मिट्टी या पीतल का करवा (कलश) रखें।
उसमें जल, सुपारी, चावल और वस्त्र रखें। - मां गौरी व गणेश जी की पूजा
दीपक जलाकर मां पार्वती और गणेश जी का पूजन करें।
कथा सुनें — वीरवती की कथा या करक चौथ की कथा। - चंद्रमा को अर्घ्य
रात में जब चंद्रमा उदित हो, तो जल, दूध, रोली और चावल से अर्घ्य दें।
मंत्र —
“ॐ चन्द्राय नमः।”
इसके बाद पति का दर्शन कर व्रत का पारण करें।
🌕 करवा चौथ व्रत कथा (वीरवती की कथा)
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार —
एक बार एक रानी वीरवती ने अपने पति की दीर्घायु के लिए कठोर उपवास रखा।
भाइयों ने बहन की तकलीफ देखकर छल से दीपक दिखाकर कहा — “चाँद निकल आया।”
रानी ने व्रत तोड़ दिया, पर थोड़ी देर बाद उसके पति की मृत्यु हो गई।
देवी पार्वती के वरदान से, जब उसने पुनः तप किया, तो उसका पति जीवित हो गया।
तभी से इस व्रत को “करवा चौथ” कहा जाने लगा।
🌺 करवा चौथ में करवा (कलश) का महत्व
“करवा” का अर्थ है “मिट्टी या धातु का पात्र”।
यह जल का प्रतीक है — जो जीवन, शुद्धता और समर्पण का द्योतक है।
पूजा में इसे सौभाग्य और आशीर्वाद का पात्र माना जाता है।
इसीलिए व्रत का नाम “करवा चौथ” पड़ा — चौथ की तिथि का वह व्रत जिसमें “करवा” का विशेष पूजन होता है।
🧡 पति-पत्नी के रिश्ते का आध्यात्मिक अर्थ
करवा चौथ केवल स्त्रियों का व्रत नहीं है,
यह विश्वास, प्रेम और निष्ठा का प्रतीक है —
जहाँ पति पत्नी के बिना अधूरा है और पत्नी पति के प्रति अटूट समर्पित।
यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा वैवाहिक बंधन शरीर का नहीं, आत्मा का होता है।
🔮 शास्त्रीय संदर्भ और सांस्कृतिक विकास
हालाँकि यह व्रत आज भावनाओं और सौंदर्य से भरपूर पर्व बन चुका है,
लेकिन इसका मूल आधार श्रद्धा और संयम है।
स्कंद पुराण में कहा गया है —
“यथा चन्द्रस्य कलाः सर्वाः, तथैव पतिव्रतायाः फलप्रदाः।”
अर्थात — “जैसे चंद्रमा की कलाएँ उसकी शोभा बढ़ाती हैं, वैसे ही पतिव्रता स्त्रियों की साधना उन्हें फल प्रदान करती है।”
समय के साथ लोककथाओं और क्षेत्रीय परंपराओं ने इस व्रत को और भावनात्मक बना दिया।
उत्तर भारत में इसे “सौभाग्य पर्व” कहा गया,
तो राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में “सखियों का त्यौहार” माना गया —
जहाँ महिलाएँ एक-दूसरे को करवा, सिंदूर, और मिठाई भेंट करती हैं।
🪶 धार्मिक लाभ (Spiritual Significance)
- दीर्घायु की प्राप्ति
पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। - मानसिक शुद्धि
निर्जला उपवास आत्मसंयम और मन की दृढ़ता सिखाता है। - वैवाहिक सौभाग्य की वृद्धि
यह व्रत दाम्पत्य जीवन में स्थिरता और समर्पण बढ़ाता है। - कर्मफल सिद्धि
संयम और श्रद्धा से किया गया व्रत, कर्मफल को शुभ बनाता है।
🌼 क्या करवा चौथ का उल्लेख पुराणों में है?
हाँ — स्कंद पुराण, भविष्य पुराण, और व्रतराज में करक चौथ व्रत का उल्लेख मिलता है।
हालाँकि वहाँ यह “करवा चौथ” नाम से नहीं, बल्कि “करक चतुर्थी” या “करक व्रत” के रूप में वर्णित है।
व्रत की तिथि, विधि, और पूजा का उद्देश्य वही है — पति की आयु और सौभाग्य की रक्षा।
🕊️ निष्कर्ष
करवा चौथ एक ऐसा पर्व है जिसमें आस्था, प्रेम, संयम और संस्कार एक साथ समाहित हैं।
यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय स्त्रीत्व की उस भावना का प्रतीक है
जो अपने जीवनसाथी की दीर्घायु के लिए समर्पित रहती है।
यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि
“सच्चा व्रत वह है जो प्रेम और श्रद्धा से किया जाए, न कि केवल परंपरा निभाने के लिए।”
📚 स्रोत:
- स्कंद पुराण (व्रत खंड)
- भविष्य पुराण (व्रत पर्व)
- पद्म पुराण (उत्तर खंड)
- व्रतराज (स्मृति ग्रंथ)
- उत्तर भारत की लोककथाएँ (वीरवती कथा परंपरा)





