संकष्टी चतुर्थी 2025: तिथि और समय
संकष्टी चतुर्थी व्रत (Sankashti Chaturthi Vrat) गणपति बप्पा को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इसे संकटा हर चतुर्थी भी कहते हैं क्योंकि यह व्रत सभी प्रकार के दुखों और संकटों को दूर करता है।
तिथि: बुधवार, 10 सितंबर 2025
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 10 सितंबर 2025, सुबह 02:25 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 11 सितंबर 2025, सुबह 04:50 बजे
- चंद्रोदय समय: 10 सितंबर 2025, रात्रि 08:05 बजे
व्रती चंद्रमा के उदय होने के बाद ही व्रत का पारण (समापन) करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि
- प्रातः कालीन स्नान और संकल्प:
- सूर्योदय से पहले स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
- गणेश पूजन (Ganesh Puja):
- गणेश जी की प्रतिमा को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
- रोली, अक्षत, दूर्वा (Durva), मोदक और लड्डू अर्पित करें।
- गणपति जी के 21 नामों का जाप करें।
- व्रत नियम (Fasting Rules):
- दिनभर निर्जला व्रत या केवल फलाहार करें।
- भोजन चंद्रमा के दर्शन के बाद ही ग्रहण करें।
- चंद्र पूजा (Moon Puja):
- रात्रि में चंद्रोदय होने पर अर्घ्य दें।
- “ॐ चन्द्राय नमः” मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद ही व्रत तोड़ें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
प्राचीन कथा के अनुसार, एक बार देवता और असुरों के बीच भीषण युद्ध हुआ। असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली। पराजित देवता अत्यंत दुखी होकर भगवान शिव के पास पहुँचे। भगवान शिव ने उन्हें सलाह दी कि वे गणेश जी की आराधना करें।
देवताओं ने संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया और गणपति बप्पा की आराधना की। उनकी कृपा से देवताओं को पुनः शक्ति प्राप्त हुई और वे असुरों पर विजय पा सके।
इसीलिए इस चतुर्थी को संकष्टी कहा जाता है क्योंकि यह सभी प्रकार के संकटों का नाश करती है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
- संकटों से मुक्ति और सफलता प्राप्ति।
- मानसिक शांति एवं परिवार में सुख-समृद्धि।
- पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति।
- गणेश जी की कृपा से कार्य सिद्धि और बाधा निवारण।
तृतीया श्राद्ध 2025: तिथि और समय
पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2025) में तीसरे दिन तृतीया श्राद्ध (Tritiya Shraddha) मनाया जाता है। इस दिन वे लोग श्राद्ध करते हैं जिनके पितरों की मृत्यु तृतीया तिथि को हुई हो।
तिथि: बुधवार, 10 सितंबर 2025
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 09 सितंबर 2025, दोपहर 12:40 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2025, सुबह 11:10 बजे
अतः तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर को ही किया जाएगा।
तृतीया श्राद्ध विधि
- प्रातः स्नान और पवित्र वस्त्र धारण करें।
- कुशा, जल, पुष्प और तिल से तर्पण करें।
- पितरों के नाम का संकल्प लेकर पिंडदान करें।
- ब्राह्मणों और गौमाता को भोजन कराएँ।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान दें।
तृतीया श्राद्ध का महत्व
- पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति।
- पितृ दोष (Pitru Dosh) से मुक्ति।
- घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति।
- इस दिन किया गया दान अनेक गुना फलदायी होता है।
10 सितंबर 2025: क्या करें और क्या न करें
✔️ करना चाहिए:
- गणेश जी की पूजा और चंद्र दर्शन।
- पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध।
- जरूरतमंदों को भोजन और दान।
❌ नहीं करना चाहिए:
- नकारात्मक विचार और क्रोध।
- मांसाहार और नशे का सेवन।
- पितरों का अनादर।
निष्कर्ष
10 सितंबर 2025 का दिन विशेष रूप से पावन है।
- एक ओर संकष्टी चतुर्थी व्रत है जो गणेश जी को समर्पित है और संकटों को दूर करता है।
- दूसरी ओर तृतीया श्राद्ध है, जो पितरों की आत्मा की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ है।
इस दिन व्रत, पूजा और दान के साथ-साथ आत्मचिंतन और पितृ तर्पण का महत्व और भी बढ़ जाता है।




