Asmad Gurubhyo Namah 
Shrimate Ramanujay Namah
Asmad Parangurubhyo Namah

देवउठनी एकादशी – भगवान विष्णु के जागरण का पर्व और इसका धार्मिक महत्व

Devuthani Ekadashi | 2025

परिचय

देवउठनी एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।
यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं

आषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम हेतु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह बाद कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी को जागते हैं।
इसलिए इस दिन को देवउठनी एकादशी या हरि प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है।


देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व

देवउठनी एकादशी का अर्थ है — “वह दिन जब देवता उठते हैं”।
यह दिन हिंदू पंचांग में एक नए शुभ आरंभ का प्रतीक है।
माना जाता है कि इस दिन से सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, व्रत आदि पुनः आरंभ हो सकते हैं।

इस एकादशी को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि सत्कर्म और भक्ति का आरंभ सदैव भगवान की कृपा से होता है


पौराणिक कथा (Mythological Story)

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने तीन पग भूमि दान में दे दी थी।
वामन अवतार के रूप में भगवान ने ब्रह्मांड को माप लिया और बलि को पाताल लोक में स्थान दिया।
राजा बलि ने प्रार्थना की कि भगवान विष्णु सदैव उनके साथ रहें।
भगवान विष्णु ने उसकी इच्छा स्वीकार की और चार महीने (चातुर्मास) तक पाताल लोक में योगनिद्रा में रहे।
चातुर्मास समाप्त होने पर कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु जागे — इसलिए यह दिन देवउठनी एकादशी कहलाया।


देवउठनी एकादशी की पूजा विधि (Puja Vidhi)

देवउठनी एकादशी की पूजा प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक की जाती है।
पूजा की विधि इस प्रकार है:

  1. प्रातःकाल स्नान और व्रत आरंभ:
    सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
    इस दिन केवल फलाहार या जल का सेवन किया जाता है।
  2. भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा:
    भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
    तुलसी के पौधे के पास दीपदान करें, जल चढ़ाएं और फूल अर्पित करें।
  3. देवउठनी एकादशी की परंपरागत पूजा:
    जमीन पर गोबर से चौक (मंडल) बनाकर उसमें भगवान विष्णु का चित्र या प्रतीक बनाएं।
    दीपक जलाकर भगवान को उठाने का मंत्र बोलें:
    “उठो देव जागो देव, कार्तिक मास में नींद त्यागो देव”
    इसके बाद आरती करें।
  4. तुलसी विवाह का आयोजन:
    कई स्थानों पर इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है।
    तुलसी और शालिग्राम (भगवान विष्णु का प्रतीक) का विवाह कराया जाता है, जो पवित्रता और प्रेम का प्रतीक है।
  5. भजन और कथा श्रवण:
    दिनभर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन किए जाते हैं और एकादशी कथा सुनी जाती है।

देवउठनी एकादशी व्रत का महत्व

  • व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं।
  • भगवान विष्णु की कृपा से धन, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है।
  • जीवन में नए शुभ कार्यों का आरंभ करने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • तुलसी विवाह करने से घर में सुख-समृद्धि और वैवाहिक आनंद आता है।

तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी का संबंध

देवउठनी एकादशी को ही तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त माना जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु (शालिग्राम) और माता तुलसी का विवाह संपन्न कराया जाता है।
यह विवाह धरती और स्वर्ग के मिलन का प्रतीक है — जो यह दर्शाता है कि भक्ति और प्रेम से ही जीवन पूर्ण होता है।


देवउठनी एकादशी के लाभ

  1. मन और आत्मा की शुद्धि होती है।
  2. घर-परिवार में सुख और समृद्धि आती है।
  3. मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ दिन।
  4. विष्णु और लक्ष्मी कृपा से पापों का नाश होता है।
  5. शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्षेत्रीय परंपराएँ

  • उत्तर भारत में इस दिन विशेष रूप से तुलसी विवाह और दीपदान किया जाता है।
  • गुजरात और महाराष्ट्र में भक्त गोवर्धन पूजा की तरह अन्नकूट तैयार करते हैं।
  • बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में महिलाएँ व्रत रखती हैं और रातभर जागरण करती हैं।

निष्कर्ष

देवउठनी एकादशी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि जीवन के जागरण का प्रतीक है।
यह हमें सिखाती है कि चार महीने की साधना और संयम के बाद जब भगवान विष्णु जागते हैं, तो वह समय हमारे लिए नए आरंभ, नई ऊर्जा और नई आस्था लेकर आता है।

इस एकादशी का पालन करने से जीवन में सकारात्मकता, भक्ति और समृद्धि बढ़ती है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की कृपा से ही जीवन में शुभता का उदय होता है।


संक्षेप में

  • तिथि: कार्तिक शुक्ल एकादशी
  • देवता: भगवान विष्णु
  • प्रमुख अनुष्ठान: व्रत, तुलसी विवाह, दीपदान
  • लाभ: शुभ कार्यों की शुरुआत, पापों से मुक्ति, समृद्धि
  • All
  • Blog
Bhagya Kundli

दिसम्बर 2, 2025

भारतीय वैदिक ज्योतिष एक ऐसी प्राचीन विज्ञान प्रणाली है जिसमें ग्रह, नक्षत्र, तिथि और राशि के आधार पर मनुष्य के...

Bhajans And Mantras

नवम्बर 10, 2025

🌕 Introduction Margashirsha Maas (मार्गशीर्ष मास), जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” कहा है, अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है।यह...

अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें

किसी भी पूजा, अनुष्ठान या ज्योतिष परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें।