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jyotish vedic karmkand

कर्मकांड

कर्मकांड

कर्मकांड भारतीय वैदिक संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसका तात्पर्य केवल यज्ञ-अनुष्ठान से नहीं, बल्कि मानव जीवन के सभी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कृत्यों से
है। वेदों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार, मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी सोलह संस्कार, पूजा-पाठ, हवन, श्राद्ध, विवाह, भूमि-पूजन आदि कर्मकांड के अंतर्गत आते हैं।
कर्मकांड दो शब्दों से मिलकर बना है: कर्म (जो भी किया जाए) और कांड (अध्याय या विधि)।

इसका अर्थ है — जीवन के प्रत्येक महत्त्वपूर्ण अवसर या घटना पर, वेदों के निर्देशानुसार, निश्चित विधि से कर्म करना वैदिक कर्मकांड कहलाता है। वेदों में कहा गया है कि कर्मकांड से व्यक्ति को इच्छित फल की प्राप्ति होती है, चाहे वह भौतिक सुख-संपत्ति हो या मोक्ष जैसी पारलौकिक उपलब्धि।