धनतेरस हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे दीपावली उत्सव की शुरुआत माना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपने घरों की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और सुख, स्वास्थ्य तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
धनतेरस 2026 कब है?
वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है।
पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे तक रहेगी। दिल्ली के लिए प्रचलित धनतेरस पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक बताया गया है। यह समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से पूजा का समय अवश्य देखें।
धनतेरस का अर्थ क्या है?
धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है—धन और तेरस। धन का अर्थ संपत्ति और तेरस का संबंध त्रयोदशी तिथि से है।
इस दिन धन और समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य को भी विशेष महत्व दिया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का अधिष्ठाता माना जाता है। इसलिए धनतेरस केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना का अवसर भी है।
धनतेरस का धार्मिक महत्व
धनतेरस को दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला प्रमुख दिन माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
इस पर्व का संदेश है कि धन के साथ स्वास्थ्य, संतोष और सदाचार भी जीवन में महत्वपूर्ण हैं।
भगवान धन्वंतरि की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। समुद्र मंथन से अनेक दिव्य वस्तुएँ प्रकट हुईं। इसी क्रम में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनके प्राकट्य की स्मृति में धनतेरस के दिन उनकी पूजा की जाती है।
इस कथा से हमें स्वास्थ्य, जीवन और चिकित्सा के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलती है।
धनतेरस की पूजा सामग्री
धनतेरस की पूजा के लिए अपनी परंपरा के अनुसार ये सामग्री रख सकते हैं:
- भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का चित्र या प्रतिमा
- दीपक और घी या तेल
- रोली और अक्षत
- चंदन और फूल
- फल और मिठाई
- धूप और कपूर
- जल और पंचामृत
- नैवेद्य
- पूजा के लिए स्वच्छ आसन
धनतेरस की पूजा विधि
सुबह की तैयारी
सुबह घर की सफाई करें और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। शाम को पूजा के लिए आवश्यक सामग्री तैयार कर लें।
शाम की पूजा
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
- दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण करें।
- भगवान धन्वंतरि को फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- फल और मिठाई का नैवेद्य लगाएं।
- धन्वंतरि मंत्र और लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
- अंत में आरती करके परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
धनतेरस पर यम दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा भी है। इसे यम दीपदान कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है। दीपदान की दिशा और विधि परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अपनाई जाती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर लोग अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार नई वस्तुएँ खरीदते हैं। सामान्य रूप से इन वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा है:
- सोना और चांदी
- तांबे, पीतल या अन्य धातु के बर्तन
- पूजा सामग्री
- घर के उपयोग की नई वस्तुएँ
- धनिया और अन्य पारंपरिक शुभ सामग्री
हालाँकि किसी वस्तु को खरीदना अनिवार्य नहीं है। त्योहार का वास्तविक भाव श्रद्धा, स्वास्थ्य और संतोष से जुड़ा है। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही खरीदारी करनी चाहिए।
धनतेरस के मंत्र
भगवान धन्वंतरि मंत्र:
ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
माता लक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
भगवान कुबेर मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जा सकता है।
क्या धनतेरस पर व्रत रखना जरूरी है?
नहीं, धनतेरस पर पूजा करने के लिए व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। भक्त सामान्य भोजन करते हुए भी भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा कर सकते हैं।
इस दिन का मुख्य भाव स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना करना है।
निष्कर्ष
धनतेरस स्वास्थ्य, समृद्धि और शुभ शुरुआत का पर्व है। वर्ष 2026 में यह 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ यम दीपदान की परंपरा भी निभाई जाती है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, संतोष और परिवार की खुशहाली में भी होती है।
FAQ
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 में 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
परंपरा के अनुसार सोना, चांदी, धातु के बर्तन और घर के उपयोग की वस्तुएँ खरीदी जाती हैं। खरीदारी अपनी सामर्थ्य के अनुसार करनी चाहिए।
धनतेरस पर यम दीपदान क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार यम दीपदान परिवार की मंगलकामना और दीर्घायु की प्रार्थना के लिए किया जाता है।
क्या बिना व्रत के धनतेरस की पूजा कर सकते हैं?
हाँ, बिना व्रत रखे भी धनतेरस की पूजा श्रद्धापूर्वक की जा सकती है।




