वर्ष 2026 में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व भारत के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से संबंधित है। कुछ क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल और केरल में, विजयादशमी के अनुष्ठान 21 अक्टूबर को भी मनाए जा सकते हैं। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा का समय अवश्य जाँचें।
दशहरा बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की कथा का स्मरण किया जाता है। देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी इस पर्व का संबंध है।
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा मनाने के पीछे दो प्रमुख धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित हैं।
1. भगवान श्रीराम की रावण पर विजय
रामायण की कथा के अनुसार, लंकापति रावण ने माता सीता का हरण किया था। भगवान श्रीराम ने माता सीता को मुक्त कराने और धर्म की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया। अंततः श्रीराम ने रावण का वध किया और अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की।
इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
2. माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय
दशहरे का संबंध देवी दुर्गा की विजय से भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
इस कारण विजयादशमी शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का पर्व माना जाता है।
दशहरा 2026 की पूजा विधि
दशहरे के दिन भगवान श्रीराम, माँ दुर्गा और अपने परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जा सकती है।
पूजा की सामान्य विधि:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
- भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएँ।
- पुष्प, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
- श्रीराम का स्मरण करें और रामायण या रामचरितमानस के उपयुक्त प्रसंग का पाठ करें।
- माँ दुर्गा की आराधना करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शमी वृक्ष, औजारों, पुस्तकों या कार्यस्थल की पूजा करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
पूजा की विधि क्षेत्र, परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
विजयादशमी का शुभ मुहूर्त
विजयादशमी पर परंपरागत रूप से अपराह्न काल में पूजा, शमी पूजन और कुछ अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। विजय मुहूर्त को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है।
2026 के लिए दिल्ली के पंचांग में विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक बताया गया है। यह समय दिल्ली के लिए है; अन्य शहरों में समय अलग हो सकता है।
पूजा या किसी नए कार्य का शुभारंभ करने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करें।
दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का महत्व
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। शमी को शुभता, धैर्य और विजय का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक परंपराओं में शमी वृक्ष का संबंध पांडवों के अज्ञातवास और उनके अस्त्रों को सुरक्षित रखने की कथा से भी जोड़ा जाता है। इस कारण कुछ परिवार दशहरे पर शमी वृक्ष का पूजन करते हैं और अपने जीवन में सफलता तथा मंगल की कामना करते हैं।
शमी पूजन करते समय वृक्ष और प्रकृति के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। पत्तियाँ तोड़ने के बजाय स्थानीय परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक पूजा भी की जा सकती है।
दशहरा और नए कार्यों का शुभारंभ
विजयादशमी को कई लोग नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं। इस दिन कुछ परिवार नए व्यवसाय, शिक्षा, लेखन, कला या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का आरंभ करते हैं।
परंपरा के अनुसार, इस दिन पुस्तकों, लेखन सामग्री, औजारों और कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा भी की जाती है। इसका उद्देश्य अपने काम के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और जिम्मेदारी का भाव व्यक्त करना है।
किसी नए कार्य की सफलता के लिए शुभ मुहूर्त के साथ-साथ उचित योजना, परिश्रम और विवेक भी आवश्यक हैं।
दशहरे पर रावण दहन का महत्व
रावण दहन दशहरे की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक है। कई शहरों और कस्बों में सार्वजनिक मैदानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इन आयोजनों में रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम की कथा का मंचन भी होता है।
रावण दहन का प्रतीकात्मक संदेश है कि अहंकार, अन्याय, क्रोध और अनुचित आचरण से दूर रहना चाहिए। यह पर्व हमें अपने व्यवहार में सत्य, विनम्रता और जिम्मेदारी अपनाने की प्रेरणा देता है।
रावण दहन देखने के लिए सार्वजनिक आयोजन में जाएँ तो आयोजकों के निर्देशों का पालन करें और निर्धारित सुरक्षित स्थान पर ही रहें।
दशहरा 2026 पर क्या करें?
दशहरे के अवसर पर निम्नलिखित कार्य अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं:
- भगवान श्रीराम और माँ दुर्गा की पूजा करें।
- रामायण या रामचरितमानस के प्रसंगों का पाठ करें।
- परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ पर्व की खुशियाँ बाँटें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
- अपने काम, शिक्षा और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण का संकल्प लें।
- क्रोध, अहंकार और अन्याय से दूर रहने का प्रयास करें।
- प्रकृति और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखें।
दशहरा 2026 की शुभकामनाएँ
विजयादशमी का पर्व सभी के जीवन में साहस, आशा और सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है। यह हमें याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए।
इस पावन अवसर पर अपने परिवार, मित्रों और प्रियजनों को शुभकामनाएँ दें।
दशहरा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!
भगवान श्रीराम की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और सफलता आए। माँ दुर्गा आपको शक्ति, साहस और सद्बुद्धि प्रदान करें। आपके जीवन में सत्य की विजय हो और हर नया प्रयास सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े।
निष्कर्ष
दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन में अच्छाई को अपनाने और बुराइयों को त्यागने का अवसर है। भगवान श्रीराम की विजय और माँ दुर्गा की शक्ति हमें सत्य, साहस, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
ज्योतिष वैदिक कर्मकांड की ओर से सभी पाठकों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और नई उपलब्धियाँ लेकर आए।




